SHREE J. M. GOYENKA SANSKRIT, MAHAVIDYALAYA, BHADAINI ,VARANASI

श्री जे.एम. गोयनका संस्कृत महाविद्यालय, भदैनी, वाराणसी

Affiliated by S.S.V.V, Varanasi

संस्था का परिचय

तपोमूर्ति अच्युत मुनि जी महाराज की प्रेरणा से श्रेष्ठिप्रवर श्री गैरीशंकर गोयनका जी द्वारा संवत् 1983 (सन 1926) में भारतीय संस्कृति एवं देववाणी संस्कृत के प्रचार-प्रसार एवं संरक्षण-संवर्धन को केन्द्र बिन्दु मानकर सनातन धर्मानुकूल श्रुति-स्मृति-पुराणों में प्रतिपादित संस्कृत भाषा के माध्यम से धार्मिक व्यवहारिक शिक्षा के मूल उद्‌देश्य की पूर्ति हेतु ...

संस्था का परिचय

तपोमूर्ति अच्युत मुनि जी महाराज की प्रेरणा से श्रेष्ठिप्रवर श्री गैरीशंकर गोयनका जी द्वारा संवत् 1983 (सन 1926) में भारतीय संस्कृति एवं देववाणी संस्कृत के प्रचार-प्रसार एवं संरक्षण-संवर्धन को केन्द्र बिन्दु मानकर सनातन धर्मानुकूल श्रुति-स्मृति-पुराणों में प्रतिपादित संस्कृत भाषा के माध्यम से धार्मिक व्यवहारिक शिक्षा के मूल उद्‌देश्य की पूर्ति हेतु माघ शुक्ल वसन्त-पञ्चमी (माघ शु॰ 0५) के शुभ दिन अपने पिता व पितामह की स्मृति में श्री जोखीराम मटरूमल्ल गोयनका संस्कृत महाविद्यालय की स्थापना की जिससे कि संस्कृत-साहित्य एवं वेद तथा वेदाङ्ग सम्बन्धित शाखाओं में स्व-स्व विषयों की उन्नति के लिए व्युत्पन्न विद्वान तैयार हों, जो व्यवहारानुकूल हिन्दी तथा अंग्रेजी भाषा से समायोजन करते हुए संस्कृत भाषा एवं वेद-वेदाङ्गों का प्रचार प्रसार कर सके साथ ही उक्त महाविद्यालय के सफल संचालन हेतु एक (ट्रस्ट) श्री गौरीशंकर गोयनका समर्पित निधि (Gourishankar Goenka- endowment trust) की स्थापना की गयी।

श्री जो॰म॰गोयनका संस्कृत महाविद्यालय देश के संस्कृत भाषा के अग्रणी विश्वविद्यालय - श्री सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालय है। इस महाविद्यालय की गणना स्थापना से अद्यतन काशी के अग्रणी व प्रतिष्ठित महाविद्यालयों में होती रही है, जहाँ शास्त्री एवं आचार्य की कक्षाओं में मुख्य रूप से, वेद वेदाङ्ग, निरुक्त, पुराणेतिहास, मीमांसा, धर्मशास्त्र, वैदिक दर्शनों इत्यादि के साथ ही आधुनिक विषयों यथा हिन्दी, संगणक एवं अंग्रेजी विषयों का अध्ययन-अध्यापन होता है। अध्ययन-अध्यापन को केन्द्र में रखकर महाविद्यालय सांस्कृतिक-कार्यक्रमों एवं सामाजिक-गतिविधियों में भी अपनी भूमिका का निर्वहन करता है।

Campus Overview
संस्थापक
श्री गौरीशंकर जी गोयनका
Campus Facilities
25+ Years Excellence
About Our Callege

Measurable Excellence in Education

इस महाविद्यालय का अपना पुस्तकालय- श्री विश्वनाथ पुस्तकालय है, जिसकी स्थापना स्वयं श्री गौरीशंकर गोयनका जी द्वारा ही हुयी है। जिसमें लगभग 33,476 दुर्लभ मुद्रित ग्रन्थों के साथ-साथ प्रायः 1662 दुर्लभ हस्तलिखित पाण्डुलिपियों का संग्रह है एवं महामहोपाध्याय पं॰ श्री गोपीनाथ कविराज जैसी विश्वविख्यात विभूति के सान्निध्य का गौरव इस पुस्तकालय को प्राप्त है। स्वयं कविराज महोदय ने अपनी समस्त पुस्तकें इस पुस्तकालय को प्रदान कर दीं, जो आज भी संरक्षित हैं।

इस महाविद्यालय के अध्ययन-अध्यापन की शास्त्रीय परम्परा विश्व में विलक्षण रहे, इस निमित्त श्री गोयनका जी के करकमलों द्वारा श्री अच्युतमुनि जी की स्मृति में अच्युत-ग्रन्थमाला की स्थापना की । इस ग्रन्थमाला के अन्तर्गत अब तक 35 महत्वपूर्ण ग्रन्थों का प्रकाशन हो चुका है। वतर्मान में इस ग्रन्थमाला का संपादन-कार्य निलम्बित है ।